Saturday, October 30, 2010

मत रोको उसे पढने दो...

मत रोको उसे पढने दो...




मत रोको उसे पढने दो,



मत बाँधो उसे बढने दो,



पत्नी होगी, माँ भी होगी,



उसका जीवन तो गढने दो!



मत खीचों उसे चढने दो,



मत थामो उसे गिरने दो,



आसमानों को छू भी लेगी,



कुछ उसको भी उड लेने दो!



मत टोको उसे हँसने दो,



मत छेडो उसे रोने दो,



सबका तो वो सुन ही लेगी,



कुछ उसको भी कह लेने दो!



तुम जहाँ बढे वो वहाँ बढी,



तुम जहाँ रूके वो वहाँ रूकी,



अपनी मन्जिल पा लेगी वो,



कुछ उसको भी चल लेने दो!



जग सो भी गया वो जगी रही,



कर्तव्यों से वो डगी नही,



सबका जीवन महका देगी,



खुद उसको तो खिल लेने दो!



सब कामों को वो कर लेगी,



सब मुसीबतें वो हर लेगी,



सबके सपने सच कर देगी,



उसके सपने तो बुनने दो!

बचपन

छीनकर खिलौनो को बाँट दिये गम ।


बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम।।

अच्छी तरह से अभी पढ़ना न आया

कपड़ों को अपने बदलना न आया

लाद दिए बस्ते हैं भारी-भरकम।

बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम।।



अँग्रेजी शब्दों का पढ़ना-पढ़ाना

घर आके दिया हुआ काम निबटाना

होमवर्क करने में फूल जाये दम।

बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम।।



देकर के थपकी न माँ मुझे सुलाती

दादी है अब नहीं कहानियाँ सुनाती

बिलख रही कैद बनी, जीवन सरगम।

बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम।।



इतने कठिन विषय कि छूटे पसीना

रात-दिन किताबों को घोट-घोट पीना

उस पर भी नम्बर आते हैं बहुत कम।

बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम।।