Saturday, October 30, 2010

मत रोको उसे पढने दो...

मत रोको उसे पढने दो...




मत रोको उसे पढने दो,



मत बाँधो उसे बढने दो,



पत्नी होगी, माँ भी होगी,



उसका जीवन तो गढने दो!



मत खीचों उसे चढने दो,



मत थामो उसे गिरने दो,



आसमानों को छू भी लेगी,



कुछ उसको भी उड लेने दो!



मत टोको उसे हँसने दो,



मत छेडो उसे रोने दो,



सबका तो वो सुन ही लेगी,



कुछ उसको भी कह लेने दो!



तुम जहाँ बढे वो वहाँ बढी,



तुम जहाँ रूके वो वहाँ रूकी,



अपनी मन्जिल पा लेगी वो,



कुछ उसको भी चल लेने दो!



जग सो भी गया वो जगी रही,



कर्तव्यों से वो डगी नही,



सबका जीवन महका देगी,



खुद उसको तो खिल लेने दो!



सब कामों को वो कर लेगी,



सब मुसीबतें वो हर लेगी,



सबके सपने सच कर देगी,



उसके सपने तो बुनने दो!

6 comments:

POOJA... said...

सुन्दर भावों से भरी, प्यारी सी रचना... ऐसे भावों की बहुत ज़रुरत है हमारे समाज में...

Anupam Karn said...

बढ़िया पोस्ट !!

Patali-The-Village said...

सुन्दर भावों से भरी, प्यारी सी रचना...

SUMIT GOYAL said...

thank 2 all.... :) :) :)

राम त्यागी said...

आपका हिंदी ब्लॉग्गिंग में स्वागत है !!

विक्की निम्बल said...
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