रातो को तन्हाई में, अक्सर सोचा करते हैं क्या खास है पाया तुम में, तुम पर क्यों हम मरते हैं? सवाल ये हमने किया खुद से जब, एक बार न सों बार किया जवाब कभी न आया जुदा सा, हर बार एक इज़हार किया तुम को पाकर हम हुए धनवान, तुमको खो कर हुए गरीब कोशिश बहुत की हमने, पर बदल न पाए अपने नसीब फिर भी दिल में एक आस है, तेरे पास होने का एहसास है दूर तू नजरो से हो मगर, दिल के हर दम पास है आजा अब लौट के आजा, तेरे बिना मन उदास है जल्दी आजा, दौड़ के आजा, ना जाने कब तक इन साँसों में सांस है
खुदा कहूँ ईश्वर कहूँ आज कल God का रिवाज है ; अज्ञात की तलाश है , अज्ञान का ही वास है ; खुदा कहूँ ईश्वर कहूँ आज कल God का रिवाज है ; धर्म पे है वाद अब भी ,भाषा का विवाद अब भी ; भूख तो बिखरी पड़ी है ,आस तो उघडी खडी है; अज्ञात की तलाश है ,अज्ञान का ही वास है ; रोजी पे लड़ते हैं हम छेत्र के नाम पे , घर में दुबक जातें हैं कुछ उद्दंडों के काम पे ; गाँधी को लड़ाते हैं हम, कभी भगत कभी आजाद से ; कभी आम्बेडकर को बनाते हैं खुदा जाती के नाम से / अज्ञात की तलाश है ,अज्ञान का ही वास है ; कर्ण है महान क्यूंकि सच का साथ ना दे सका , अर्जुन ना चडा जुबान पे क्यूंकि वो बुरा ना हो सका ; अहंकारी ,असंयमित हम खुद हैं कमियां दूजे की ढूंढ़ रहे , जो ना हुआ देश का वो कब किसी का हो सका / अज्ञात की तलाश है ,अज्ञान का ही वास है ;
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